: क्या महंगाई से त्रस्त आम जनता को मिलेगी बड़े हुए संपतिकर की दोहरी मार से राहत ?
admin
Tue, Mar 25, 2025रतलाम शहर की आम जनता इन दिनों नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए संपत्ति कर की दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ जीर्ईएस सर्वे में प्राप्त क्षेत्रफल के आधार पर संपत्तिकर का पुनः निर्धारण हुआ है तो दूसरी तरफ संपत्ति कर में बढ़ोतरी होने पर पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता का तेल निकल रहा है।
पूरे शहर में संपतिकर की दोहरी मार चर्चा का विषय है, कुछ दिनो पूर्व रतलाम जिला प्रॉपर्टी व्यवसाई संघ ने भी आम जनता के हित में अपनी 6 प्रमुख मांगो में एक मांग बड़े हुए संपति कर को समाप्त करने की रखी थी। जिससे कांग्रेस के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी का समर्थन भी प्राप्त हुआ था।
बाजार में चर्चा का विषय गर्म है कि वर्तमान रतलाम निगम सरकार के एमआईसी कार्यकाल को 2 वर्ष पूर्ण हुए हैं, तो 5 वर्ष तक का बड़ा हुआ संपतिकर लेना नियम विरुद्ध है। नियम अनुसार 2 वर्ष का बड़ा हुआ संपतिकर ही लिया जा सकता है।
वर्तमान में नगर पालिक निगम रतलाम में समस्त भूमि/भवनों का जीआईएस सर्वे किया गया है, जिसके अन्तर्गत प्राप्त क्षेत्रफल/उपभोग पर संपत्तिकर का पुनः निर्धारण मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 138 के अन्तर्गत नियम 10 व 11 के अधीन प्रावधानों के अनुसार यदि किसी भवन के निर्मित क्षेत्रफल में 10 प्रतिशत का अंतर है तो ध्यान में नहीं लिया जावेगा। किन्तु 10 प्रतिशत से अधिक का अंतर हो ऐसी स्थिति में भूमि/भवन स्वामी ऐसी शास्ति का भुगतान करने के दायित्वधीन होगा, जो ऐसे भवन स्वामी द्वारा किये गये स्व निर्धारण तथा नगर निगम द्वारा की गई जांच/पुनः निर्धारण के अन्तर की राशि के पांच गुना के बराबर होगा।उदाहरण के तौर पर जैसे कि वर्तमान में निमित क्षेत्रफल 92.93 अनुसार संपत्तिकर की राशि 1447 जीआईएस सर्वे पश्चात निमित क्षेत्रफल 139.40 अनुसार संपत्तिकर की राशि 2686 अंतर राशि (2686-1447) - 1239 गुणा 5 बराबर 6195 संपति कर देना होगा। एक तरफ जीआईएस सर्वे में बड़े हुए संपति कर की मार झेल रही आम जनता को दूसरी ओर बड़े हुए संपत्तिकर कर का भी बोझ झेलना पड़ रहा है।
क्या आज निगम के साधारण सम्मेलन में गूंजेगा बड़े हुए संपत्तिकर का मामला ?
क्या महंगाई की दोहरी मार झेल रही जनता को मिलेगी बड़े हुए संपत्तिकर से राहत ?
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