विश्वास के 86 वर्ष : अक्षय तृतीया पर डी.पी.ज्वेलर्स पर आभूषणों का नायाब संग्रह
Sun, Apr 19, 2026
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर इस वर्ष खरीदारी का विशेष 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' दो दिनों तक रहने वाला है। रविवार, 19 अप्रैल और सोमवार, 20 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस महापर्व के लिए रतलाम का प्रतिष्ठित और विश्वसनीय संस्थान
डी.पी. ज्वेलर्स
पूरी तरह तैयार है। ग्राहकों की सुविधा और मुहूर्त की महत्ता को देखते हुए शोरूम दोनों दिन सुबह 10:30 बजे से देर रात तक खुला रहेगा।
परंपरा और पारदर्शिता का संगम :
संस्थान के डायरेक्टर
अनिल जी कटारिया
ने बताया कि डी.पी. ज्वेलर्स की नींव 1940 में स्व. श्री धूलचंदजी कटारिया द्वारा रखी गई थी। पिछले 86 वर्षों से संस्थान ने बदलते ट्रेंड के साथ कदम मिलाया है, लेकिन गुणवत्ता और शुद्धता के मापदंडों से कभी समझौता नहीं किया। आज देशभर में 30 लाख से अधिक परिवार डी.पी. ज्वेलर्स की पारदर्शिता और अटूट भरोसे के कारण इससे जुड़े हुए हैं।
विशाल संग्रह और आधुनिक सुविधाएँ : संतोष जी कटारिया
के अनुसार, डी.पी. ज्वेलर्स ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रमुख शहरों जैसे इंदौर, भोपाल, उदयपुर, कोटा और अजमेर सहित कई केंद्रों पर अपनी पहचान बनाई है। अक्षय तृतीया के अवसर पर शोरूम में:
हॉलमार्क गोल्ड एवं 100% नेचुरल डायमंड ज्वेलरी
का विशेष कलेक्शन।
सोने-चांदी के सिक्के, कलाकृतियाँ और बर्तनों की विस्तृत रेंज।
ग्राहकों के लिए लिफ्ट, पार्किंग और त्वरित बिलिंग की सुविधा।
खरीदी के बाद
निःशुल्क शुद्धता जाँच
की व्यवस्था।
आसान निवेश योजनाएं :
ग्राहकों की खरीदारी को सुगम बनाने के लिए
विकास जी कटारिया
ने जानकारी दी कि शोरूम पर
'स्वर्ण समृद्धि'
और
'डैज़लिंग डायमंड'
जैसी स्कीम्स उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से ग्राहक किश्तों में भी ज्वेलरी खरीद सकते हैं। उन्होंने बताया कि मार्केट में लिस्टेड ब्रांड होने के नाते डी.पी. ज्वेलर्स का प्रत्येक डिज़ाइन ग्राहकों की पसंद और आधुनिक ट्रेंड को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सोना सुख-समृद्धि लाता है। इसी भाव का सम्मान करते हुए डी.पी. ज्वेलर्स अपनी शुद्धता की विरासत के साथ ग्राहकों के स्वागत के लिए तत्पर है। खरीदारी के लिए रतलाम सहित डी.पी. ज्वेलर्स के सभी शोरूम्स पर विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि ग्राहकों को एक यादगार शॉपिंग अनुभव मिल सके।
ई-टोकन : बिना खाद बेचने वाले 5 निजी विक्रेताओं को नोटिस
Thu, Apr 9, 2026
जिले में उर्वरक वितरण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-टोकन प्रणाली की अनदेखी करने वाले विक्रेताओं पर प्रशासन ने नकेल कसना शुरू कर दिया है। कलेक्टर मिशा सिंह के आदेशानुसार, जिले के 5 निजी उर्वरक विक्रेताओं को ई-टोकन के बिना खाद बेचने पर 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है।
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास, श्री आर.के. सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 1 अप्रैल से पूरे जिले में
ई-विकास (ई-टोकन)
प्रणाली के माध्यम से ही शत-प्रतिशत उर्वरक वितरण के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, 5 अप्रैल को निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पांच निजी विक्रेताओं ने बिना ई-टोकन जनरेट किए ही खाद का विक्रय किया।
होगी सख्त कार्रवाई :
कृषि विभाग के अनुसार, इन विक्रेताओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि इन विक्रेताओं के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध
उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985
के प्रावधानों के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की सुविधा के लिए नियम अनिवार्य :
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो, ताकि किसानों को लंबी लाइनों से निजात मिले और कालाबाजारी पर रोक लग सके। सभी निजी और सहकारी विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही खाद का वितरण सुनिश्चित करें।
रसोई पर क्षेत्रवाद : शहरों में 25 तो गांवों में 45 दिन में सिलेंडर
Tue, Apr 7, 2026
मध्य प्रदेश सरकार की ईंधन समीक्षा बैठक ने एक बड़े विवाद को हवा दे दी है। मंत्रालय में हुई मंत्रिमंडल समिति की बैठक में घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए जो समय सीमा तय की गई है, उसने सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। नियम के मुताबिक, शहरों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक किए जा सकेंगे।
जनता का सवाल: क्षेत्र बदलने से क्या खपत बदल जाती है ?
सरकार के इस नियम पर आम जनता और विशेषज्ञों ने कड़ा ऐतराज जताया है। सवाल यह है कि क्या भौगोलिक क्षेत्र बदल जाने से रसोई में गैस की खपत कम हो जाती है ? एक औसत परिवार की जरूरतें शहर और गांव में एक जैसी होती हैं, फिर ग्रामीणों को 45 दिन के लंबे इंतजार की 'सजा' क्यों दी जा रही है ? क्या यह मान लिया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग लकड़ी या चूल्हे पर निर्भर हैं ?
कड़े तेवर: पीएनजी अपनाओ वरना कटेगा कनेक्शन :
बैठक में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पीएनजी विस्तार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने लक्ष्य दिया है कि अगले 3 महीनों में 2 लाख नए घरों तक पाइपलाइन पहुंचाई जाए। अधिकारियों को दो टूक कहा है कि जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां के उपभोक्ता जल्द आवेदन करें। यदि आगामी 3 माह में पीएनजी कनेक्शन नहीं लिया गया, तो उपभोक्ताओं का एलपीजी (सिलेंडर) कनेक्शन बंद किया जा सकता है।
कालाबाजारी और आपूर्ति का दावा :.
सरकार का कहना है कि प्रदेश में क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है। कालाबाजारी रोकने के लिए अब तक 3226 स्थानों पर छापे मारकर 3872 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। पर जब्त सिलेंडर के उपयोग पर अभी तक स्पष्टीकरणक कमी है। व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति भी अब 20% से बढ़ाकर 70% कर दी गई है।
5 दिन में मिलेगा नया कनेक्शन :
अब आवासीय परिसरों, स्कूलों और आंगनवाड़ियों को आवेदन के मात्र 5 दिन के भीतर पीएनजी कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। मैनपावर बढ़ाने के लिए आईटीआई और पॉलिटेक्निक प्रशिक्षार्थियों की मदद ली जाएगी।
निष्कर्ष:
एक तरफ सरकार पीएनजी के जरिए आधुनिकता का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर के लिए 45 दिन का इंतजार करवाकर एक बड़ी आबादी के साथ भेदभाव कर रही है। अब देखना यह है कि इस विरोध के बाद क्या सरकार बुकिंग के इन 'अजीब' नियमों में कोई बदलाव करती है या नहीं।