कलेक्ट्रेट में आत्मदाह का प्रयास : 3 साल से मुआवजे के लिए भटक रहा किसान खुद पर डाला पेट्रोल Video
Raj Kumar Luniya
Wed, May 27, 2026
कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब जनसुनवाई में पहुंचे पीड़ित किसान प्यार सिंह ने प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। तीन साल से मुआवजे के लिए भटक रहे किसान को वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आत्मदाह करने से रोका। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन ने मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की है।
3 साल का दर्द और कलेक्ट्रेट में आंसू : प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किसान प्यार सिंह अपनी फरियाद लेकर जनसुनवाई में आया था। लंबे समय से समाधान न मिलने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान था। अचानक उसने खुद पर पेट्रोल डाल लिया और रोते हुए चिल्लाने लगा, "तीन साल से यहां आ रहा हूं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।" पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर शांत कराया।
नकली फर्टिलाइजर से खराब हुई थी फसल, कंपनी पर FIR : घटना के बाद कलेक्ट्रेट में मची खलबली के बीच एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने मामले का पूरा ब्योरा सामने रखा। प्रशासन के अनुसार, मामला किसी प्राकृतिक आपदा का नहीं है, बल्कि निजी कंपनी की धोखाधड़ी का है:
किसान प्यार सिंह ने वर्ष 2023 में लहसुन की फसल बोई थी। एक निजी फर्टिलाइजर कंपनी की दवाओं (कीटनाशक/खाद) के उपयोग के कारण उनकी पूरी फसल खराब हो गई थी। किसान इसी का मुआवजा मांग रहा है।
जांच में अड़चन: एडीएम ने बताया कि तत्कालीन समय में मामले की जांच कराई गई थी, लेकिन जिले में उन्नत लैब सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण दवाओं का तकनीकी परीक्षण सीमित रहा। हालांकि, प्रशासन ने उस समय संबंधित फर्टिलाइजर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
सरकारी राहत क्यों नहीं ? उपभोक्ता फोरम के फैसले पर टिकी उम्मीद : एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला प्राकृतिक प्रकोप (बाढ़, सूखा या ओलावृष्टि) से संबंधित नहीं है, इसलिए प्राकृतिक आपदा राहत मद (आरबीसी 6-4) के अंतर्गत किसान को सरकारी सहायता राशि दिए जाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
उपभोक्ता फोरम में है मामला: प्रशासन के मुताबिक, किसान प्यार सिंह ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया है। नियमानुसार, अब उन्हें अंतिम राहत उपभोक्ता फोरम के निर्णय के बाद ही प्राप्त हो सकती है। कलेक्ट्रेट स्तर पर इस मुआवजे का सीधा भुगतान संभव नहीं है।
Tags :
जनसुनवाई
रतलाम_कलेक्ट्रेट
आत्मदाह
विज्ञापन
विज्ञापन