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बिना क्रेन के पसीने में तर-बतर पुलिस : मशक्कत कर लोडिंग वाहनों में ले जाने पड़े जब्त वाहन

Raj Kumar Luniya

Wed, Mar 11, 2026

शहर के हृदय स्थल चांदनी चौक में मंगलवार को रतलाम यातायात पुलिस ने नो-पार्किंग के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया, लेकिन इस दौरान पुलिस की बेबसी और संसाधनों की कमी भी साफ नजर आई। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में 10 वाहनों को जब्त तो किया गया, लेकिन क्रेन न होने के कारण पुलिसकर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

लोडिंग वाहनों का सहारा, पुलिस का पसीना छूटा : अभियान के दौरान जब नो-पार्किंग में खड़े वाहनों को उठाने की बारी आई, तो यातायात पुलिस के पास खुद की क्रेन उपलब्ध नहीं थी। हार मानकर पुलिस को निजी लोडिंग वाहनों का सहारा लेना पड़ा। जवानों ने जैसे-तैसे कड़ी मेहनत कर जब्त वाहनों को लोडिंग गाड़ी में चढ़ाया और थाने तक पहुँचाया। यह दृश्य शहर की यातायात व्यवस्था के आधुनिकरण पर सवाल खड़े करता है। अगर सरकार द्वारा 112 की तर्ज पर हर जिले की यातायात पुलिस को एक क्रेन मिल जाए तो शहरो का यातायात सुगम हो सकता है।

  • क्यों बंद हुई क्रेन ? पूर्व में नगर निगम और यातायात पुलिस के संयुक्त सहयोग से शहर में क्रेन का संचालन किया जाता था। सूत्रों के अनुसार:

  • कर्मचारियों की लापरवाही: क्रेन कर्मचारियों द्वारा नियमित कार्रवाई न करने से संचालन घाटे में जाने लगा।

  • निगम का फैसला: घाटा बढ़ने के कारण नगर निगम प्रशासन हर थोड़े समय में क्रेन सेवा बंद कर देता है, जिससे सड़कों पर फिर से अव्यवस्था फैल जाती है।

  • समाधान: पुलिस की अपनी क्रेन और फोर-व्हीलर टोइंग सुविधा : जानकारों और विभागीय चर्चाओं के अनुसार, यदि यातायात पुलिस के पास स्वयं की अत्याधुनिक क्रेन हो, तो स्थिति बदल सकती है।

  • मुनाफे का मॉडल: यदि क्रेन में टू-व्हीलर के साथ फोर-व्हीलर टोइंग करने की सुविधा जोड़ दी जाए, तो जुर्माने से होने वाली आय से इसे मुनाफे के सौदे में बदला जा सकता है।

  • नियमितता: खुद के संसाधन होने पर पुलिस को नगर निगम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और कार्रवाई साल के 365 दिन नियमित रूप से चल सकेगी।

कार्रवाई का विवरण : निरीक्षक राजशेखर वर्मा एवं सूबेदार अनोखीलाल परमार के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में चांदनी चौक से 10 वाहन जब्त किए गए। पुलिस ने एक बार फिर जनता से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि जब तक पुलिस के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे, शहर को जाम मुक्त करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

नगर निगम की 'यातायात समिति' हुई नदारद : शहर के यातायात को सुगम बनाने की बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम की यातायात समिति की होती है, यह समिति समय-समय पर मीटिंग कर प्रेस नोट जारी कर यातायात सुधार के बड़े-बड़े दावे तो ठोकती है पर इनका कार्य निगम की चार दिवारी से बाहर निकल कर जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पाता है। नियमानुसार समिति के पास निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य हैं:

  • क्रेन संचालन: शहर में अवैध पार्किंग हटाने के लिए क्रेन की व्यवस्था।

  • रोटरी निर्माण: चौराहों का वैज्ञानिक तरीके से चौड़ीकरण और रोटरी बनाना।

  • अवैध बैनर-होर्डिंग: दृश्यता बाधित करने वाले अवैध विज्ञापनों को हटाना।

  • पार्किंग स्थल: नए पार्किंग स्थलों का चिन्हांकन और विकास। ​परंतु, समिति की सुस्ती के चलते ये सभी काम ठप पड़े हैं और पूरी जिम्मेदारी का बोझ अकेले यातायात पुलिस के कंधों पर आ गया है।

  • शहर को अतिक्रमण मुक्त रखना: शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी भी निगम की रहती है। यातायात पुलिस केवल सहयोगी बन सकती है।

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