श्मशान में भी घोटाला : जनसुनवाई में मुर्दो के नाम पर हुए घोटाले की भी अनसुनी
Raj Kumar Luniya
Sun, Aug 24, 2025
रतलाम मप्र। सरकारों ने भले ही सीएम हेल्प लाईन, जनसुनवाई जैसे कार्यक्रम जनता को त्वरित न्याय और जन की समय पर सुनवाई के लिए लगाए हो, मगर सिस्टम में बैठे जिम्मेदार शासन की इस पावन मंशा को पूरा करने में कम ही या बिलकुल भी रुचि नही दिखाते है। नामली नगर परिषद की उपाध्यक्ष ने श्मशान के नाम पर हुए घोटाले की शिकायत जिला स्तरीय जनसुनवाई में करीब डेढ़ माह पूर्व की थी, अब इस शिकायत को जांच करने वाले फाईलों में दफन करने का मन बना चुके है।
मामला 8 जुलाई 2025 को उस समय शुरु हुआ, जब नामली नगर परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती पूजा योगी ने जिला स्तरीय जनसुनवाई में नामली में परिषद द्वारा संचालित श्मशान में होने वाली आय में हुए भ्रष्टाचार सहित अन्य मामलों की शिकायत की गई। शिकायत का आवेदन एडीएम शालीनी श्रीवास्तव ने लेकर प्रभारी परियोजना अधिकारी को देते हुए तत्काल कार्यवाही के निर्देश भी दिए।
इधर एडीएम के हाथों से निकली इस शिकायत की जांच ऐसे अफसर अरुण पाठक को दी गई जो वर्षो से रतलाम में ही टीके (जमे) होकर जनता, नेता और वरिष्ठ अधिकारियों को मूर्ख बनाने में माहिर होना बताए जाते है।
उक्त शिकायत पर जांच लटकती रही और 6 अगस्त को शिकायत कर्ता को पता चला कि कलेक्टर ने जांच दल गठित करने की बजाय ग्रामीण एसडीएम को सौप दी है। अब ये एसडीएम वो जिनके अनुभाग की ही 376 से ज्यादा सीएम हेल्प लाईन की शिकायते अधर में लटक रही है। सीएम हेल्प लाईन शिकायतों के समय पर निराकरण नही कर पाने के कारण इन्हे भरी अनुभागीय अधिकारियों की बैठक में एडीएम ने जमकर फटकार भी लगाई थी। शिकायत कर्ता ने जब एसडीएम से जानकारी ली तो पता चला कि ये अभी नामली सीएमओं से दस्तावेज मांग रहे है।
नामली नगर परिषद सहित अन्य विकासखण्डों के ऐसे तमाम और कई शिकायती आवेदन है, जिन पर महिनों और सालों सुनवाई नही होती या उनका निराकरण नही होता है। शिकायती आवेदन देने वाला आवेदक कई मर्तबा शिकायते कर इस नाकारा सिस्टम के आगे घुटने टेक देता है और अन्याय,दमन की विजय हो जाती है।
जनता की अनसुनी का एक कारण ये भी है कि यहां कई अफसर वर्षो से जमे हुए है। इनके पैर उस अंगद के समान है, जिन्हे नेता, मंत्री, पत्रकार और समाजसेवी आदि भी नही हटा सकते है।
अब जो ग्रामीण एसडीएम सीएम हेल्प लाईन में हुई 300 से ज्यादा शिकायतों को लेकर बैठा हो वो जनसुनवाई के आवेदन पर क्या कार्रवाई करेगे ?
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