400 वर्ष प्राचीन शांतिनाथ जैन मंदिर : पवित्रता भंग होने पर जैन समाज में भारी आक्रोश: Video
Raj Kumar Luniya
Thu, Feb 19, 2026
शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक श्री शांतिनाथ जैन मंदिर (बागड़ो का वास) में पिछले दिनों हुई गतिविधियों को लेकर जैन समाज ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेतांबर पेढ़ी ट्रस्ट बोर्ड और सकल जैन श्री संघ के पदाधिकारियों ने गुरुवार को जिला कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
धार्मिक मान्यताओं के उल्लंघन का आरोप : ज्ञापन में बताया गया कि यह मंदिर 400 वर्ष से अधिक प्राचीन है, जहाँ जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार अत्यंत शुद्धता और मर्यादा का पालन किया जाता है। समाज का आरोप है कि 15 फरवरी 2026 को शिवरात्रि के पर्व पर प्रशासन की उपस्थिति में कुछ लोगों द्वारा मंदिर परिसर में खान-पान किया गया और जूठे मुंह मंदिर की मर्यादा भंग की गई। साथ ही, जैन धर्म में वर्जित 'जमीकंद' (कंदमूल) का उपयोग मूर्तियों के समक्ष किया गया, जिससे संपूर्ण जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

न्यायालय के आदेशों का हवाला : ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1954 से चले आ रहे विवाद के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने इस मंदिर को पूर्णतः 'जैन मंदिर' घोषित किया था। न्यायालय ने निर्देश दिए थे कि यदि किसी अन्य पक्ष का कोई स्वत्व (अधिकार) है, तो वह न्यायालय से निर्धारित कराएं, जो आज तक नहीं हुआ है। ज्ञापन के अनुसार, वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद, प्रशासन ने जैन समाज को विश्वास में लिए बिना अन्य लोगों को आयोजन की अनुमति कैसे दी, यह जांच का विषय है।

प्रशासन को चेतावनी : सकल जैन श्री संघ के वरिष्ठजनों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर परिसर में गैर-जैन धर्मावलंबियों द्वारा इस प्रकार की अवांछित गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो जैन समाज स्वयं आगे आकर सख्त कदम उठाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
मुख्य मांगें:
उक्त घटनाक्रम की तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए।
पवित्र मंदिर परिसर में खान-पान और अन्य वर्जित कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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