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: जीवन में सब कुछ पाना है, तो संयम और धैर्य जरूरी है : प.पू साध्वी श्री अनंत गुणा श्रीजी मसा.

admin

Mon, Aug 12, 2024

  सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरि त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सुरिश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभाश्री जी  म.सा. की  सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका  चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं इसी तारतम्य में आज 11 अगस्त 2024,रविवार को साध्वी श्री साध्वी श्री अनंत गुणा श्रीजी मसा. ने व्याख्यान में कहा कि महावीर स्वामी के पास एक साधक आया और उसने प्रश्न किया कि मुझे जीवन में सब कुछ मिलना चाहिए किस तरीके से मिल सकता है तो महावीर स्वामी ने कहा कि जीवन में सब कुछ पाना है तो संयम और धैर्य जरूर है संयम और धैर्य नहीं आने से क्रोध आएगा।जब तक संयम और धैर्य  नहीं आएगा तब तक कुछ मिलने वाला नहीं है।जीवन में चार चीज़ आवश्यक है पहला मनुष्य जीवन दूसरा जिनवाणी तीसरी श्रद्धा  और चौथा आचरण। आपको मनुष्य जीवन मिला है श्रेष्ठ जीवन मिला है बड़ी बड़ी मुश्किल से आपने जैन कुल में जन्म लिया है यह सौभाग्य की बात है। इसके बाद अपने जीवन में जिनवाणी को उतार लिया तो आप मुक्ति के मार्ग पर प्रशस्त हो जाते हैं। जिनवाणी को जीवन में उतरने के लिए श्रद्धा और अच्छा आचरण आवश्यक है।यह चारों प्रकार के संयम रखेंगे अच्छा आचरण रखेंगे तो मुक्ति मिल सकती है। मनुष्य का जिनवाणी के अलावा उद्धार नहीं है।

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धार्मिक कार्य में खड़े रहते हो तो तुम्हारे पैर दुखते हैं कमर दुखती है नींद आती है पर फालतू बात करते हो तो उसके लिए पंचायत के लिए तुम्हारे पास में समय भी है और खड़े भी रहते हो और शरीर में कोई तकलीफ नहीं होती। इसीलिए यह नियम बना कि रोज जिनवाणी सुनना चाहिए जब तक जिनवाणी नहीं सुनते तब तक मुक्ति संभव नहीं है। धैर्य को कभी नहीं तोड़ना है श्रद्धा मजबूत हो जाएगी तो उसे अनुरूप आचरण हो जाएगा। मसा. ने चंदू और बदामी की कहानी सुनाई। गुरु भगवंत के पास जाते हो तो नियम मूर्ख बनाने जैसा मत लिया करो भगवान भी समझते हैं,स्वयं की आत्मा भी समझती है और गुरु भगवंत भी समझते हैं कि तुम क्या कर रहे हो ऐसा नियम  लो जिससे दूर व्यसनों से दूर रहना, पाप आदि को समाप्त करने का नियम होना चाहिए।पाप अभी तीन प्रकार के हो गए हैं अभक्ष्य छोड़ने की कोशिश करो।उलूल जुनूल चीज चाऊमीन,बर्गर,पिज़्ज़ा आदि खाने के बाद आप अनुमोदना कर देते हो तो उसका भी आपको पाप लगता है होटल में खाना अच्छा नहीं है क्योंकि बड़ी-बड़ी होटल में लिखावेज रहता है और नॉनवेज भी उसी में बनता है अभी जितनी भी होटल हैं ज्यादातर होटले मुसलमानों की है और उसमें नाम जैन दे देते हैं,राधे कृष्णा आदि नाम दे देते हैं। इस तरह से आपको भ्रमित किया जा रहा है होटल में जाना बंद कर दो  त्याग कर दो और घर में अच्छा से अच्छा बनाओं और साधु संतों की सेवा करो तो तुम आपके जीवन में लाभ मिलेगा। यह सब फैशनेबल पाप है। जिससे धर्म,संयम और आचरण से मुक्ति प्राप्त हो सकती है। मंगल प्रवचन के पश्चात महामांगलिक सुनाई गई तथा एकासने, बियासणे और आयंबिल वाले  का बहुमन किया गया।            

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आज नवकार मंत्र का पर व्याख्यान होगा और उसके एक-एक अक्षर को समझाया जाएगा।नवकार से बेड़ा पार नवकार मंत्र की आराधना साधना बेड़ा पार कर सकती है। 15 अगस्त को एक पौधा मां के नाम के अंतर्गत पौधारोपण  किया जाएगा।पौधों का नखरा रखा गया है  पौधों के साथ में ट्री गार्ड भी दिया जाएगा।चातुर्मास समिति आपसे अनुरोध करती है की अधिक की संख्या में पौधे लगाए और अपने वातावरण को शुद्ध करें।सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।

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