मेडिकल कॉलेज बना भ्रष्टाचार का अड्डा : 2023 से लगे रहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही
Raj Kumar Luniya
Sun, Jun 15, 2025
केस 1 : पालन अवकाश की स्वीकृति के लिए 5 हजार रुपए की अवैध मांग
रतलाम मेडिकल कॉलेज में पदस्थ 2 महिला नर्सिंग कर्मचारियों ने मार्च 2023 में लिखित शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि उनके पालन अवकाश की स्वीकृति के लिए स्थापना शाखा में पदस्थ जितेन्द्र ठाकुर नामक बाबू द्वारा 5000 रुपये की अवैध मांग की जारही है।
रतलाम एक्सप्रेस ने इस मामले में 28 अप्रैल 2025 को डीन से किया था सवाल : क्या भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप वाले इस शिकायती आवेदन की मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा जांच की गई थी ?
रतलाम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ अनीता मूतथा द्वारा जवाब मिला कि मामला पुराना है इसलिए मेरी जानकारी में नहीं है। में कल आपको जानकारी लेकर बताती हु। 2 महीने बीत चुके पर उनका कल आज तक नहीं हुआ।
उक्त शिकायती पत्र नर्सिंग कर्मचारियों द्वारा मार्च 2023 में डीन एवं अधीक्षक को दिया गया था पर उक्त भ्रष्टाचारी बाबू पर 2 साल में कोई कार्यवाही नहीं की गई। आज दिनाँक तक उक्त भ्रष्टाचारी बाबू को स्थापना शाखा से तक नहीं हटाया गया। इतनी गंभीर शिकायत के बावजूद 2 साल में कोई कार्यवाही न करना रतलाम मेडिकल कॉलेज प्रशासन के उच्च अधिकारियों पर उक्त बाबू को संरक्षण देने जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है ?
केस 2 : फर्जी तरीके से पुनः अधिकारी की नियुक्ति
12 जून 2025 को शिकायत करता द्वारा आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल मध्य प्रदेश को शिकायत आवेदन प्रेषित किया गया कि : रतलाम मेडिकल कॉलेज में पदस्थ अस्पताल प्रबंधक अंकित शर्मा द्वारा नौकरी से इस्तीफा देने के बाद फर्जी तरीके से पुनः नौकरी ज्वाइन कर अवैध रूप से पद में बने रहने की शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को मेरे द्वारा की गई थी। अंकित शर्मा द्वारा 08/12/2023 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया गया था जिसकी जानकारी स्वयं अंकित शर्मा द्वारा रतलाम मेडिकल कॉलेज के व्हाट्सएप ग्रुप INCHARGE GROUP GMC में सूचना पोस्ट कर दी गई थी।
दिनांक 12/11/2022 के पत्र अनुसार चयन सूची में अंकित शर्मा का नाम अपस्ताल प्रबंधक के रूप में चयनित हुए लगभग 36 दिवस बाद 19/12/2022 को पदभार ग्रहण किया गया था। अंकित शर्मा द्वारा एक वर्ष से भी कम समय के भीतर दिनांक 8/12/2023 को नौकरी से त्यागपत्र दें दिया गया था उनके द्वारा अन्य राज्य में शासकीय सेवा कर वेतन प्राप्त किया गया था। फिर अचानक 75 दिवस के बाद अवैध रूप से पुनः नौकरी ज्वाइन कर पिछले 13-14 माह से अवैध रूप से पद पर कार्यरत रहकर वेतन प्राप्त किया जारहा है।
शिकायत में यह भी बताया गया कि दिनांक 09/06/2025 को जीतेंद्र सिंह ठाकुर का मुझे कॉल आया था जिसमे उन्होंने मुझे धमकाते हुए 13 जून 2025 को डीन कार्यालय में उपस्थित होने के लिए बोला गया। यह वही जीतेन्द्र सिंह ठाकुर है जिनकी सहायता से अंकित शर्मा द्वारा अवैध रूप से पुनः ज्वाइनिंग ली गई है और मेरे द्वारा अपने पूर्व पत्र में जीतेंद्र सिंह ठाकुर के विषय में भी जाँच हेतु निवेदन किया गया था।
अंकित शर्मा के त्यागपत्र की सूचना रतलाम डीन को पिछले 14-15 माह से संज्ञान में है और जीतेंद्र सिंह ठाकुर की भूमिका संदिग्ध होते हुए भी वे स्थापना शाखा में बने हुई हैं और उनके ही खिलाफ दिए गए शिकायत पत्र पर वे खुद की जांच प्रक्रिया में शामिल हैं।
ऐसे में उक्त संस्था से पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती है। मेरे इस पत्र को मेरा कथन मानकर जाँच में शामिल किया जाए। आपसे निवेदन है कि मेरे द्वारा प्रेषित पूर्व पत्र पर संचालनालय स्तर पर ही बिन्दुवार तथ्यों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जाँच करने का कष्ट करें।
केस 1 पर अभी तक डीन द्वारा कोई भी जवाब नहीं दिए जाने पर हमारे द्वारा केस 2 पर कोई सवाल ? नहीं किया जारहा है !
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