निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं : कलेक्टर ने गठित किए जांच दल, स्कूलों और दुकानों पर रखी जाएगी पैनी नजर
Raj Kumar Luniya
Sat, Apr 4, 2026
जिले के निजी विद्यालयों (अशासकीय स्कूलों) द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही पाठ्य पुस्तकें, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। मध्य प्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, कलेक्टर मिशा सिंह ने इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए विशेष निरीक्षण दलों का गठन कर दिया है।
सतत निगरानी और औचक निरीक्षण : कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये दल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सतत भ्रमण करेंगे और इस बात की निगरानी रखेंगे कि कोई भी स्कूल प्रबंधन किसी विशेष दुकान या स्वयं के विद्यालय से सामग्री क्रय करने के लिए छात्र या अभिभावक को बाध्य न करे। यदि किसी स्कूल के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है, तो गठित दल तत्काल जांच करेगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ विधि अनुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला और विकासखंड स्तर पर कमेटियां गठित : प्रशासन ने इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए दो स्तरों पर निगरानी दल बनाए हैं:
जिला स्तरीय दल: इसमें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), सहायक संचालक शिक्षा और जिला परियोजना समन्वयक को शामिल किया गया है। यह दल पूरे जिले के स्कूलों और दुकानों का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत होगा।
विकासखंड स्तरीय दल: रतलाम, जावरा, पिपलोदा, आलोट, सैलाना और बाजना में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), संबंधित संकुल प्राचार्य और विकासखंड स्रोत समन्वयक (BRC) के दल बनाए गए हैं।
दुकानों की भी होगी जांच : यह दल न केवल स्कूलों का निरीक्षण करेंगे, बल्कि बाजार में पाठ्यपुस्तक और गणवेश विक्रेताओं की दुकानों की भी जांच करेंगे। बीईओ और बीआरसी संयुक्त रूप से अपने क्षेत्र के सभी अशासकीय विद्यालयों और उनसे जुड़ी दुकानों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सीधे जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे।
यदि कोई भी विद्यालय प्रबंधन आपको किसी निश्चित दुकान से सामग्री खरीदने के लिए विवश करता है, तो आप इसकी शिकायत जिला शिक्षा विभाग या संबंधित विकासखंड कार्यालय में कर सकते हैं।
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