: आज का विचार में आज खास : लाचार पिता का आशीर्वाद कम श्राप ज़्यादा
Thu, May 25, 2023
प्रिय पाठकों ? ये कलयुग है यहां अब सब कुछ हो सकता हैं । हमारे समय में यदि मोहल्ले में कोई बीमार पड़ जाता था तब खबर मिलते ही हर कोई हाल
चाल पूछने चला जाता था औऱ आज के कलयुगी इंसान की तो बात ही निराली हैं । आज कोई बीमार का पता लग जाये तो मुह मोड़ लेते है । इसको इस ख़ास
उदाहरण के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं । कुछ ही बिरले लोगों को छोड़कर ।
उदाहरण :
यदि कही रोड पर कोई बीमार , लाचार , दिव्यांग , बेसहारा, दिखे , या एक्सीडेंट में कोई इंसान
सड़क पर मिले तो सबसे पहले वह अपना मोबाइल निकालकर उसका वीडियो बनाएगा फ़िर तत्काल इंस्टाग्राम , व फेसबुक पर लाइव आकर दिखायेगा , मानो उसने कोई अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीत लिया हो । मेरी नज़र में ऐसे लोग बेवकूफ की श्रेणी में आते है ।
ऐसे समय इंसान का कर्तव्य :
ऐसे समय मे आपको तत्काल एम्बुलेंस व पुलिस कंट्रोल रूम को बताना है । एम्बुलेंस या पुलिस फोर्स के आने में किसी कारण देरी हो रही हो तो किसी भी साधन से उसे नजदीकी अस्पताल भिजवाना चाहिए ताकि उस घायल की जान बच सकें , जो कि सबसे बड़ा मानव धर्म है उसे हर नागरिक को निभाना है ।
चलो अब मूल टॉपिक पर बात करते हैं :
एक पढा लिखा व्यक्ति अपने वृद्ध पिता को वृद्धा आश्रम छोड़कर आता है । वही ग़रीब व्यक्ति अपने घर पर साथ रखता हैं ।
कुछ समय बाद आश्रम से उस अर्थात ( नालायक़ ) पुत्र के पास खबर आती हैं कि आपके पिता की तबीयत बहुत ख़राब है आपके पिता का अंतिम समय चल रहा है व आपको याद कर रहे है , तब यह बात नालायक़ पुत्र ने अपनी पत्नी को बताई तो पत्नी
के पास समय नही था । साथ ही अक्सर बहुओं के सास ,ससुर उनके लिए बोझ होते है व दूसरी
बात की वह अपने बच्चों में इतनी मस्त थी , की उसे भविष्य का पता नही होता है कि उसके साथ भी ऐसा हो सकता हैं , क्योंकि ? ये कलयुग हैं पाठकों यहां सब कुछ सम्भव हो सकता है । इस कारण पुत्र अकेला ही आश्रम पहुँच गया ।
अब पिता पुत्र का शिक्षा प्रद संवाद :
1, प्रश्न पुत्र का पिता से :आपकी कोई अंतिम इच्छा
हो तो बताइए ।
उत्तर पिता का :
बेटा आप यहाँ कूलर लगवा दो , गर्मी में रात भर सो नही पाता हूँ ।
2 , प्रश्न पुत्र का पिता से :पापा आपने इतने साल बिना कूलर के बिता दिए औऱ अब आप कूलर के लिए कह रहें हैं ।
उत्तर पिता का जो कि बहुत ही मार्मिक हैं व सन्सार में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाने योग्य :
पिता ने बेटे के सिर पर हाथ रखकर औऱ रुंधे गले से कहा
बेटा में अपने लिए यह नही कह रहा हु क्योंकि में तो गर्मी सहन कर सकता हूँ लेकिन जब आपके बच्चे आपको यहाँ छोड़कर जाएंगे तो आप यहां की गर्मी को सहन नही कर सकोगें ।
शिक्षा :
एक बेबस पिता ने अपने बच्चे को आख़री समय पर भी उसका बुरा नही सोचा बल्कि उसे आगाह किया है । इस संदेश को भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए । वही दूसरी औऱ इसका गहराई से अर्थ यह है कि बाप तो बाप होता है , उसके पास अपने बच्चे के जन्म से लेकर बड़े होने तक उसे जो घाव लगतें है जो दिखाई तो नही देते है परन्तु उसके पास उन घावों का भंडार होता है । बाप अपने परिवार व बच्चों के लिए हर ज़ख्म झेलने को तैयार रहता है । वह अपने पुत्र को सन्देश देकर जा रहा है कि ऐसा तेरे साथ भी हो सकता है , सन्सार वालों बाप को ज़ख्म मत दो , वह उम्र दराज होने तक कई ज़ख्म सहन कर चुका हैं । वह जिंदगी भर तक आपको पालते पालते नही थका है , औऱ वो लोग जो अपने बाप को बोझ समझकर वृद्धा आश्रम छोड़कर आ गए हो अपने साथ वापस ले आवो ।
में आज उन लोगों को यह मार्मिक सन्देश देना चाह रहा हूँ कि अपने अपने माता पिता की इज़्ज़त करो , क्योंकि ईश्वर के बाद ये ही पूज्यनीय होते है । किसी को मेरे शब्द तीर की भांति दिल मे चुभे , गहरे ज़ख्म दे , व बुरा लगे तो क्षमा करना ।
अब्दुल रशीद शेख़ लाचार पिताओं की औऱ से पत्रकार पुलिस सर्विलांस , दबंग भोपाल न्यूज़ , दबंग केसरी व रिटायर्ड टी आई इंदौर 9827230419 जय हिंद जय भारत 🇮🇳
: संस्कार शिविर के अंतर्गत आज बच्चो को बीबड़ोद जैन तीर्थ के दर्शन करवाए
Sun, May 21, 2023
रतलाम मप्र। आज के इस व्यस्तम दौर में बच्चे जहा मोबाइल के आदी बन चुके है उनसे मोबाइल को दूर करवाना सभी के लिए बहुत मुश्किल काम हो गया है। इसी तारतम्य में बच्चें धार्मिक संस्कार शिविर में शामिल होकर मोबाइल से दूरी बनाकर सोशल मीडिया से दूरी बनाकर धार्मिक गतिविधियों में रह रहे ।
आज धार्मिक शिविर में बच्चो को तीर्थ दर्शन के अंतर्गत बीबड़ोद तीर्थ ले जाकर दादा आदिनाथ के दर्शन करवाए गए । तीर्थ दर्शन के दौरान बच्चों में बहुत उत्साह और उमंग धर्म के प्रति देखा गया । यह शिविर श्रमण संघ के आचार्य डॉ शिवमुनि जी मसा की आज्ञाअनुवर्ती आयम्बिल तप चक्रेश्वरी पूज्या अरुणप्रभा जी मसा आदि ठाणा 4 के सानिध्य मे 150 से अधिक बच्चो का संस्कार शिविर सागोद रोड़ स्थित स्मारक भवन पर चल रहा है ।
शिविर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ एवं श्री जैन दिवाकर नवयुवक मंडल के सदस्यों के देखरेख चल रहा है । इस शिविर के लाभार्थी श्रीमती शांताकुमारी इन्दरमल जैन (वकील सा.) ने बताया कि इस शिविर में भाग लेने के लिये बालक बालिकाएं रतलाम नगर के साथ जावरा, मन्दसौर, नीमच, निम्बाहेड़ा, उज्जैन, मुंबई से आए है। जो मोबाइल से दूर रहकर सुबह 6.30 से रात 8 बजे तक दिनभर प्रार्थना , प्रवचन , धार्मिक अध्ययन, गेम्स, प्रतिक्रमण अपने को व्यस्त है ।
श्री जैन दिवाकर स्मारक पर 10 दिवसीय बाल संस्कार शिविर लर्न एंड टर्न मिनीमाइजेशन संस्कार शिविर में उपप्रवर्तिनी तप चक्रेश्वरी आयम्बिल आराधिका पूज्याश्री अरुणप्रभाजी म.सा., शतावधानी पूज्या श्री गुरु कीर्ति जी म.सा. मधुर गायिका पूज्या श्री गुरु निधी जी मसा एंव नवदीक्षिता श्री अरुण कीर्ति जी म.सा. एंव नगर के बुद्धिजीवी गणमान्य ज्ञानीजन बच्चों को संस्कार प्रदान कर रहे है ।
: आज का विचार में आज ख़ास : वो इंसान देवतुल्य होते है जो दूसरों के दुःखो को समझे
Fri, May 19, 2023
प्रिय पाठकों ? जीवन में घड़ी की सुइयों की तरह इंसान को भी समय से चलना चाहिए । हर इंसान अगर जीवन मे सबसे ज्यादा विश्वास करें तो उसे समय
पर करना चाहिए । जीवन मे जिस भी इंसान ने समय के महत्व को समझा उसे जिंदगी में सफलता अवश्य ही मिलती है , क्योंकि समय किसी के लिए भी
नहीं रुकता हैं ।
जीवन में इंसान का खूबसूरत होना व अच्छे वस्त्र पहनना कोई भी मायने नही रखता :
जीवन मे इंसान कितना भी खूबसूरत हो अच्छे से अच्छा वस्त्र धारण करता हो कोई भी मायने नही रखता है बस उसका दिल स्वच्छ व वाणी मधुर होना
चाहिए । जीवन में हर इंसान को दूसरों के दुःख व दर्द में मदद करना चाहिए । दुःख व दर्द का इस उदाहरण से समझने का प्रयास करते है
।
" जिंदगी में माता पिता के पैरों में ही स्वर्ग ( जन्नत ) हैं , आपकी हर सुख व दुःख में आपको अपने माता पिता से ज़्यादा कोई भी नही समझ सकता है। जिंदगी में एक बात ध्यान रखना माता पिता के द्वारा दिया गया आशीर्वाद कभी भी ख़ाली नही जाता ये वो आशीर्वाद होता है जो नामुमकिन को भी मुमकिन बना देता है "
अब जीवन की सबसे बड़ी , सच्ची व ख़ास बात कि :
1, जीवन में दूसरों पर विश्वास करना भी सिखों लेकिन सोच समझकर
2, जीवन में कोई भी माता पिता अपने बच्चों का कभी भी बुरा नही सोचते ।
3, जीवन में कभी भी दूसरों को नफ़रत भरी नजरों से मत देखों ।
4, जीवन में कभी भी किसी से भी जाति , धर्म , पद के आधार पर भेदभाव मत करो ।
5, जीवन में अपने बच्चों को धर्म का ज्ञान , संस्कृति का पाठ , उच्च शिक्षा का ज्ञान , बड़ो का आदर , सभी धर्मों का आदर , व हुनर ( जिससे वह जीवन में रोजगार ) प्राप्त कर सकें । अवश्य सिखाएं ।
6, है ईश्वर , सभी मानवों में इंसानियत की अलख जगा दो । सबका जीवन खुशहाल कर दो ।
7, है ईश्वर , सबके गुनाहों को माफ़ कर दो ।
8, अब्दुल रशीद शेख़ पत्रकार पुलिस सर्विलांस , दबंग भोपाल न्यूज़ , दबंग केसरी व रिटायर्ड टी आई इंदौर 9827230419 नई हिन्द जय भारत 🇮🇳